2016-05-28

सब का अपना सिंहस्थ रहा


कोई अस्त रहा,
कोई व्यस्त रहा,
कोई त्रस्त रहा
सबका अपना सिंहस्थ रहा
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कोई गुरू के पास रहा,
कोई माँ बाप  के साथ रहा
कोई खुद मे मस्त रहा
सब का अपना सिंहस्थ रहा
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किसी ने सीखा ,  किसी ने सीखाया
किसी ने सिर्फ खाना खाया,
सब कुछ व्यवस्थित रहा
सब का अपना सिंहस्थ रहा
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हर एक पर नजर महांकाल की थी,
किसी को उम्मीदो से ज्यादा मिला,
कोई खुद की अव्यवस्था से त्रस्त रहा
सब का अपना सिंहस्थ रहा
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कोई सब चिन्ता को छोड़ कर आया था,
कोई साथ लाया था
कोई सवालो के साथ आया था,
हर की मुराद पुरी हुई ,
कुछ ना कुछ सब के हस्त रहा,
सब का अपना सिंहस्थ रहा,

जो आ गये उन का जीवन धन्य रहा,
जो ना आ पाये ,उनका मन मन्द रहा,
महाकाल पुरी करेंगे तेरी ईच्छा,
बाकी सब मस्त रहा|
सब का अपना सिंहस्थ रहा||
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