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2016-09-18

पावागढ़ महाकाली का मंदिर, जहाँ सब की मुरादे पूरी होती है


पंखिड़ा तू उड़ी ने जजे पावागढ़ रे...।
म्हारी महाकाली ने जई ने किजो गरबो रमे रे...।

गुजरात के पंचमहल जिले में बना पावागढ़ महाकाली  का मंदिर पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। यहां की खास बात यह है कि यहां दक्षिणमुखी काली मां की मूर्ति है, जिसका तांत्रिक पूजा में बहुत अधिक महत्व माना जाता है।

महाकाली मंदिर गुजरात के पंचमहल जिले में स्थित पावागढ़ महाकाली का मंदिर पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक तथा पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश के सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है.
कालीमाता का यह मंदिर माता के शक्तिपीठों में में शामिल है. शक्तिपीठ उन पूजा स्थलों को कहा जाता है, जहां सती के अंग गिरे थे.

2016-09-12

डाकोर का रणछोड़ मंदिर

डाकोर का रणछोड़ मंदिर

श्रीकृष्ण की लीला को समझ पाना एक आम इनसान के बस में नहीं। कहीं वे गुरु की भूमिका में नजर आते हैं, कहीं सखा, कहीं भाई और कहीं रणछोड़जी। माना जाता है कि 1722 ई. में यहाँ रणछोड़दासजी मंदिर का निर्माण किया गया था। इस स्थान की गिनती हिंदुओं के पवित्र तीर्थस्थानों में की जाती है।

भक्तों के लिए रणछोड़ मंदिर का महत्व वैसा ही है, जैसा द्वारिका स्थित द्वारिकाधीश मंदिर का। दोनों ही मंदिरों में कृष्ण भगवान की मूर्तियाँ भी श्याम रंग के पत्थर से ही बनाई गई हैं। श्याम रूप में श्यामसुंदर का रूप बेहद मनोहर लगता है। गोमती नदी के किनारे इस मंदिर का निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया है। ऊपरी गुंबद में स्वर्ण का आवरण चढ़ाया गया है। यहाँ पहुँचकर महसूस होता है, जैसे आप कृष्ण की नगरी में आ गए हों। हर तरफ हरे कृष्णा ध्वनि का मधुर नाद होता रहता है। 

2015-08-17

उनाव का बालाजी सूर्य मंदिर

Unav Balaji Sun Temple

ओम सूर्याय नमः 

मध्य प्रदेश के दतिया जिले में शहर से 17 किलोमीटर दूर उन्नाओ बालाजी सिद्ध सूर्य मंदिर स्थित हे. इस स्थान में एक कुण्ड हे कहा जाता हे उसमे स्नान मात्र से सभी चर्म रोग ठीक हो जाते हैं. स्थान सिद्ध हे और अत्यंत प्राचीन. कुण्ड का जल सूर्य देव को चढ़ा कर मांगी मन्नत अवश्य पूर्ण होती हैं. लगभग चार सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक सूर्य मंदिर में संतान की चाहत रखने वाले श्रद्धालुओं की भगवान के दर्शन मात्र से संतान सुख की प्राप्ति हो जाती है।

2015-08-07

लेपाक्षी मंदिर

अनंतपुर, जिला  आंध्र प्रदेश में  झूलते पिलर (स्तम्भ) वाला लेपाक्षी मंदिर है  |



आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले का लेपाक्षी मंदिर हैंगिंग पिलर्स (हवा में झूलते पिलर्स) के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। इस मंदिर के 70 से ज्यादा पिलर बिना किसी सहारे के खड़े हैं और मंदिर को संभाले हुए हैं। मंदिर के ये अनोखे पिलर हर साल यहां आने वाले लाखों टूरिस्टों के लिए बड़ी मिस्ट्री हैं। मंदिर में आने वाले भक्तों का मानना है कि इन पिलर्स के नीचे से अपना कपड़ा निकालने से सुख-समृद्धि मिलती है। अंग्रेजों ने इस रहस्य को जानने के लिए काफी कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके।

2015-06-09

खेड़ापति हनुमान मंदिर ग्वालियर

श्री खेड़ापति जी हनुमान मंदिर ग्वालियर

खेड़ापति हनुमान मंदिर ग्वालियर की 250 वर्ष पुरानी हनुमान जी की प्रतिमा आश्चर्यजनक रूप से अपना असली रूप छोड़कर बाल रूप में आ गई।

भारत के मध्य प्रदेश राज्यान्तर्गत ग्वालियर पुरातन काल से गालव ऋषि की तपोभूमि रहा है। यहां पर संकटमोचन सिद्ध श्री खेड़ापति जी हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर की मान्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की सुबह 4.00 बजे से ही यहां भक्त दर्शनों के लिए आना शुरू कर देते है और देर रात तक यह कार्यक्रम चलता रहता है। 

श्री चिंताहरण गणेश मंदिर उज्जैन


श्री चिंताहरण गणेश मंदिर उज्जैन।

ऐसा माना जाता है कि राजा दशरथ के उज्जैन में पिण्डदान के दौरान भगवान श्री रामचन्द्र जी ने यहां आकर पूजा अर्चना की थी।

उज्जैन से करीब 6 किलोमीटर दूर भगवान श्री गणेश के तीन रूप एक साथ विराजमान है, जो चितांमण गणेश, इच्छामण गणेश और सिद्धिविनायक के रूप में जाने जाते है। श्री चिंताहरण गणेश जी की ऐसी अद्भूत और स्वयंभू अलोकिक प्रतिमा देश में शायद ही कहीं होगी। भक्त की इच्छा पूर्ण करने वाले, इच्छामण, सिद्धि देने वाले सिद्धिविनायक के साथ समस्त चिंता को दूर करने वाले चिंतामण गेणेश जी विराजमान है। इनका श्रृंगार सिंदूर से किया जाता है। श्रृंगार से पहले दूध और जल से इनका अभिषेक किया जाता है और विशेष रूप से मोदक एवं मोतीचूर के लड्डू का भोग इन्हें लगाया जाता है जो इन्हें अत्यन्त प्रिय है।