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2016-06-01

उज्जैन सिंहस्थ के 4 गिनिज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड

उज्जैन सिंहस्थ को 4 गिनिज  बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड 

1 दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक पैदल यात्रा 118 km. (पंचक्रोशी) 13 लाख लोगो न 46℃ पर की।

2 एक नदी शिप्रा के किनारो पर एक दिन में 75 लाख 7.5मिलियन लोगो ने स्नान किया।

3 दुनिया का सबसे बड़ा मानव घनत्व वाला मेला सम्पन्न हुआ जिसमे 1 माह में 8.5 करोड़ लोगो ने शिरकत की।

2016-05-28

नागा साधु, जानें, इनकी यात्रा का रहस्य


कुंभ खत्म होते रातों-रात गायब होते हैं नागा साधु, जानें, इनकी यात्रा का रहस्य        

 सिंहस्थ की पहचान बने नागा साधु आखरी शाही स्नान कर रात में ही उज्जैन से रवाना हो गए। एक महीने तक सिंहस्थ की शान नागा साधुओं के एकाएक गायब होने से लोग हैरान हैं। हैरानी का कारण ये भी है कि किसी भी कुम्भ में नागा साधुओं को आते और जाते कभी कोई नहीं देख पाता। सिंहस्थ में हजारों की संख्या में नागा साधु आए और चले भी गए, लेकिन किसी ने भी ना तो उन्हें आते हुए देखा और ना ही जाते हुए।

- वे कहां से आए, कैसे आए और कहां गायब हो गए, इसकी चर्चा अब शहर में हर कोई कर रहा है।

- *जब नागा साधुओं की इस यात्रा के बारे में जानकारी हासिल की तो कई रहस्य सामने आए।*---

- राष्ट्रीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी जी महाराज के मुताबिक, नागा साधु जंगल के रास्तों से यात्रा करते हैं। आमतौर पर ये लोग देर रात में चलना शुरू करते हैं।

- यात्रा के दौरान ये लोग किसी गांव या शहर में नहीं जाते, बल्कि जंगल और वीरान रास्तों में डेरा डालते हैं।

- रात में यात्रा और दिन में जंगल में विश्राम करने के कारण सिंहस्थ में आते या जाते हुए ये किसी को नजर नहीं आते।

- कुछ नागा साधु झुंड में निकलते है तो कुछ अकेले ही यात्रा करते हैं। ये लोग यात्रा में कंदमूल फल, फूल और पत्तियों का सेवन करते हैं।

- यात्रा के दौरान नागा साधु जमीन पर ही सोते हैं।

*ऐसे मिलती है कुंभ या सिंहस्थ में शामिल होने की सूचना ...*--

- नरेंद्र गिरी महाराज के अनुसार, हर अखाड़े में एक कोतवाल होता है। ये कोतवाल नागा साधुओं और अखाड़ों के बीच की कड़ी का काम करता है।

- दीक्षा पूरी होने के बाद जब साधु अखाड़ा छोड़कर साधना करने जंगल या कंदराओं में चले जाते हैं तो ये कोतवाल उन्हें अखाड़ों की सूचनाएं पहुंचाता है।

सब का अपना सिंहस्थ रहा


कोई अस्त रहा,
कोई व्यस्त रहा,
कोई त्रस्त रहा
सबका अपना सिंहस्थ रहा
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कोई गुरू के पास रहा,
कोई माँ बाप  के साथ रहा
कोई खुद मे मस्त रहा
सब का अपना सिंहस्थ रहा
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किसी ने सीखा ,  किसी ने सीखाया
किसी ने सिर्फ खाना खाया,
सब कुछ व्यवस्थित रहा
सब का अपना सिंहस्थ रहा
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2016-04-23

अर्धनारीश्वर का रूप किन्नरों के अखाड़े की देवत्व यात्रा

अर्धनारीश्वर का रूप किन्नरों के अखाड़े की देवत्व यात्रा गुरुवार सुबह दशहरा मैदान से निकली । अखाड़े के फाउंडर मेंबर सहित पीठाधीश्वर व देशभर से आए किन्नर शामिल इस यात्रा में शामिल हुए।

अर्धनारीश्वर का रूप किन्नरों के अखाड़े की देवत्व यात्रा गुरुवार सुबह दशहरा मैदान से निकली। अखाड़े के फाउंडर मेंबर सहित पीठाधीश्वर व देशभर से आए किन्नर शामिल इस यात्रा में शामिल हुए। यात्रा की खास बात यह थी कि इसमें सादगी को तरजीह दी गई। किन्नर अखाड़ा ज्वलंत मुद्दों से जुड़े संदेश देकर सामाजिक सरोकार भी निभा रहा है।

2016-04-17

उज्जैन सिंहस्थ कुम्भ, महत्वपूर्ण टेलीफोन नम्बर

उज्जैन सिंहस्थ कुम्भ, जरुरी जानकारियाँ:
स्थानीय् प्रशासन के महत्वपूर्ण टेलीफोन नम्बर
कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी:
1 श्री कवीन्द्र कियावत कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी 94256-00332 2514000
2 श्री अवधेश शर्मा अति. जिला दण्डाधिकारी 94068-08485 2510878
3 श्री संतोष वर्मा अपर कलेक्टर 94253-61522 2512608
4 श्री नरेन्द्र सूर्यवंशी अपर कलेक्टर 86020-02442 2520607
5 श्री जयंत जोशी संयुक्त कलेक्टर कोतवाली 94250-85575 88177-85575
6 श्री रजनीश श्रीवास्तव उपजिला निर्वाचन अधिकारी 94072-95223 2524778
7 श्री क्षितिज शर्मा एस.डी.एम. 94259-46365 2512646
8 श्री महेश कुमार बमनहा डिप्टी कलेक्टर 94250-03113 2513512

2016-04-07

क्या बताये इस भभूति का, यह तो कूबेर का खजाना है


सिंहस्थ में साधु-संतों का आना अब जोर पकड़ने लगा है। इन दिनों मेला क्षेत्र में साधु-संतों एवं सन्यासियों के दर्शनों और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन बढ़ने लगा है। दत्त अखाड़ा क्षेत्र में यह दृश्य आसानी से देखे जा सकते हैं। 

2016-03-31

सिंहस्थ 2016, प्रमुख अखाड़ों की प्रवेशाई की तिथि एवं संभावित मार्ग घोषित

 "सिंहस्थ 2016" हेतू अखाड़ा परिषद एवं प्रशासन की बैठक में अखाड़ा परिषद की ओर से 10 प्रमुख अखाड़ों की प्रवेशाई (पेशवाई) की तिथि एवं संभावित मार्ग घोषित किये गये है। 

  
श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा की प्रवेशाई 27 मार्च 2016 को, श्री पंचायती आव्हान अखाड़ा की 10 अप्रैल को, श्री तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा की प्रवेशाई 11 अप्रैल को, श्री पंचायती अग्नि अखाड़ा की 14 अप्रैल को, श्री पंचायती आनन्द अखाड़ा की 15 अप्रैल को, श्री पंचायती नया उदासीन अखाड़ा की 17 अप्रैल को, श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा की 18 अप्रैल को, श्री पंच अटल अखाड़ा की 19 अप्रैल को, श्री निर्मल अखाड़ा की 19 अप्रैल को तथा श्री पंचायत बड़ा उदासीन अखाड़ा की 20 अप्रैल को प्रवेशाई निकलेगी। 

दिनांक 27-03-2016 को श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा की प्रवेशाई नीलगंगा से फ्रीगंज, चामुण्डा माता चौराहा, देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज, कंठाल, सतीगेट, गोपाल मंदिर, ढाबा रोड़, दानीगेट, छोटा पुल, दत्त अखाड़ा से छावनी प्रवेश करने का मार्ग प्रस्तावित है। 

दिनांक 10-04-2016 को श्री पंचायती आव्हान  अखाड़ा की प्रवेशाई नीलगंगा से फ्रीगंज, चामुण्डा माता चौराहा, देवासगेट, मालीपुरा, दौलतगंज, कंठाल, सतीगेट, गोपाल मंदिर, ढाबा रोड़, दानीगेट, छोटा पुल, होते हुए दत्तअखाड़ा से छावनी प्रवेश करने का मार्ग प्रस्तावित है ।

2016-03-29

श्री अक्रूरेश्वर महादेव

श्री अक्रूरेश्वर महादेव

कहाँ स्थित है?

उज्जयिनी स्थित चौरासी महादेव में से एक श्री अक्रूरेश्वर महादेव का मंदिर अंकपात क्षेत्र में राम जनार्दन मंदिर के पास स्थित है। अंकपात क्षेत्र के पीछे भी बड़ी रोचक कथा है। उज्जयिनी स्थित संदीपनी आश्रम भगवान कृष्ण की शिक्षास्थली है। आश्रम परिसर में ही एक कुंड है और माना जाता है कि इस कुंड के ज़रिये श्री कृष्ण अपने गुरु के लिए गोमती नदी को यहां तक लेकर आये इसलिए इसे गोमती कुंड कहा जाता है। इसी गोमती कुंड के जल से श्री कृष्ण अपनी पाटी (भोजपत्र) साफ किया करते थे। इस दौरान उनके लिखे अंक कुंड में गिरे थे और फलस्वरूप इस क्षेत्र को विद्वानो का क्षेत्र कहा जाने लगा। इसी कारण इस क्षेत्र को अंकपात कहा जाता है।


अंकपादाग्रतो लिंगम सप्त कल्पानुगं महत।
यस्य दर्शनमात्रेण शुभाम् बुद्धिः प्रजायते। ।


श्री अक्रूरेश्वर महादेव की कहानी शिव पार्वती की एकरूपता को वर्णित करती है। प्रस्तुत कहानी में क्रूर बुद्धि के दोषों को दर्शाया गया है और सौम्य बुद्धि की महत्ता दर्शाई गई है।

पौराणिक आधार एवं महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार माता पार्वती ने शक्ति रूप धारण किया था और वे अत्याधिक क्रोधित हो गईं थी। उस समय चर, अचर, देवता, किन्नर, समस्त गणों, इत्यादि ने उनकी प्रदक्षिणा एवं स्तुति की थी। केवल एक भृंगिरीट गण ने उन्हें नमस्कार नहीं किया था, ना ही स्तुति की थी। भृंगिरीट का कथन था कि वे शिवजी के पुत्र हैं और उनकी ही शरण में हैं, माँ पार्वती की नहीं। इस पर माता पार्वती ने क्रोधित हो भृंगिरीट को पृथ्वी लोक में दंड भुगतने का शाप दे दिया। माता के शाप से तुरंत ही भृंगिरीट पृथ्वी लोक पर गिर पड़ा। शाप से व्यथित हो भृंगिरीट पुष्कर द्वीप में जा तपस्या करने लगा। उसके कठिन तप से ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, आदि उसके पास गए और उसके शाप के बारे में जानकर भगवान शंकर के पास पहुंचे और उन्हें सारा वृतांत कह सुनाया। तब भगवान शंकर ने भृंगिरीट से कहा कि तुम प्रजा को दुःख देने वाले तप को बंद करो। शापमुक्त होने के लिए तुम पार्वती जी की प्रार्थना करो, उनकी प्रसन्नता से ही तुम शाप मुक्त हो सकते हो।

शिवजी की बात सुन उसने श्रद्धापूर्वक माँ पार्वती की स्तुति की जिसके फलस्वरूप माता ने प्रसन्न हो कहा कि तुम महाकाल वन जाओ। वहाँ अंकपात क्षेत्र के आगे एक दिव्य लिंग है, उसके पूजन अर्चन करो। उस लिंग के दर्शन से तुम्हारी क्रूरता दूर होगी एवं बुद्धि निर्मल होगी। इससे तुम्हें पृथ्वी लोक से मुक्ति मिलेगी और पुनः कैलाश वास प्राप्त होगा। बलराम और कृष्ण ने भी क्रूर होकर कंस और केशी राक्षस का वध किया था। उसके पश्चात वे भी मथुरा से महाकाल वन आये थे और दिव्य लिंग का पूजन कर अक्रूर (सौम्य स्वभाव) हुए। तब माता की बात सुन भृंगिरीट महाकाल वन पहुंचा और बताये हुए दिव्य लिंग की आराधना की। उसके पूजन के फलस्वरूप लिंग में से अर्धनारीश्वर के रूप में शिव पार्वती प्रकट हुए। तब भृंगिरीट को ज्ञात हुआ कि शिव और पार्वती का सनातन देह एक ही है। इस तरह भृंगिरीट की बुद्धि निर्मल हुई और तभी से यह दिव्य लिंग अक्रूरेश्वर (अक्रूरेश्वर यानी बुद्धि को सौम्य करने वाले) कहलाया।

दर्शन लाभ
मान्यतानुसार श्री अक्रूरेश्वर महादेव के दर्शन करने से बुद्धि सौम्य होती है एवं क्रूरता कम होती है।

उज्जयिनी , अवंतिपुर आज, का उज्जैन

उज्जयिनी शब्द का अर्थ विजयिनी होता है, जिसका पाली समानांतर उज्जैनी है। वैसे उज्जयिनी संस्कृत शब्द है, इसका अर्थ इस प्रकार किया जा सकता है - उज् जयिनी, अर्थात उत्कर्ष के साथ विजय करने वाली। शिल लेखों में प्राकृत शब्द भी उजैनी ही देखा गया है। 



वहीं प्राचीन लेखकों द्वारा यूनानी शब्द ओझेन से इसका नाम उज्जैन रख दिया। स्कंद पुराण के अवंतिखंड के 25वें अध्याय में इसका वर्णन देखा जा सकता है। उसके अनुसार अवंती की राजधानी अवंतिपुर थी,जो उज्जयिनी कहलाती थी। अवंती के देव अध्यक्ष ने महादेव की त्रिपुरा या त्रिपुरी के शक्तिशाली राक्षक अध्यक्ष पर विजय प्राप्त करने के स्वरूप में अवंतिपुर का नाम उज्जयिनी कर दिया था। 

पुराणों के अनुसार उज्जैन के पूर्व में छह कल्पों में छह नाम थे। प्रथम कल्प में यह स्वर्णशृंगा कहलाती थी, द्वितीय में कुशस्थली, तृतीय में अवंतिका, चतुर्थ में अमरावती, पंचम में चूड़ामणि और छठे कल्प में इसका नाम पद्मावती रहा।

2016-03-28

श्री महाकालेश्वर मंदिर

भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से स्वयंभू दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर का स्थान प्रमुख है। तांत्रिक परम्परा में मात्र महाकाल को ही दक्षिण मूर्ति पूजा का महत्व प्राप्त है। इसका वर्णन महाभारत, स्कन्दपुराण, वराहपुराण, नृसिंह पुराण, शिवपुराण, भागवत, शिवलीलामृत आदि ग्रंथों में आता है। वर्तमान मंदिर तीन भाग में सबसे नीचे श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग’ उसके ऊपर ’श्री ओकारेश्वर’ एवं सबसे ऊपर श्री नागचंद्रेश्वर है। 

श्री महाकालेश्वर मंदिर के दक्षिण दिशा में श्री वृद्धमहाकालेश्वर एवं श्री सप्तऋषि के मंदिर हैं। इस मंदिर का वर्णन महाभारत, स्कन्द पुराण, वराहपुराण, नृसिंह पुराण, शिव पुराण, भागवत्, शिवलीलामृत आदि ग्रन्थां में तथा कथासरित्सागर, राजतरंगिणी, कादम्बरी, मेघदूत, रघुवंश आदि काव्यां में इस देवालय का अत्यन्त सुन्दर वर्णन दिया गया है। 

सिंहस्थ कुम्भ महापर्व उज्जैन 2016

सिंहस्थ 2016

22 अप्रैल 2016 से आरंभ होगा सिंहस्थ मेला,



इस बार सिंहस्थ का आयोजन 22 अप्रैल से 21 मई 2016 तक किया जाएगा। सिंहस्थ संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी

शाही स्नान : सिंहस्थ का प्रथम स्नान 22 अप्रैल को होगा। 

शाही स्नान 21 मई, अन्य स्नान 9, 11, 17, 19 मई को होगा।