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2016-12-14

स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना

ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना,
कमीज के बटन ऊपर नीचे लगाना।
वो अपने बाल खुद न काढ पाना,
पी टी शूज को चाक से चमकाना।
वो काले जूतों को पैंट से पोछते जाना,
ऐ मेरे स्कूल मुझे जरा फिर से तो बुलाना।
वो बड़े नाखुनो को दांतों से चबाना
और लेट आने पे मैदान का चक्कर लगाना।
वो Prayer के समय Class में ही रुक जाना।
पकडे जाने पे पेट दर्द का बहाना बनाना।

2016-11-28

पहली बार पौरुष भरी ललकार सुनाई दी

आज के ऐतिहासिक दिन और भारतीय सेना के अदम्य साहस और सर्जिकल स्ट्राइक पर खुशी व्यक्त करती प्रतीक दवे रतलामी की ये कविता 

सीमा पर आज सखे एक हुंकार सुनाई दी हमको ,
पहली बार पौरुष भरी ललकार सुनाई दी हमको ,
पहली बार भरतवंशी होने पर अभिमान हुआ ,
पहली बार अपनी शक्ति का हमको ज्ञान हुआ ,
पहली बार स्वर्ग में देखो खुदीराम मुस्काया है ,
पहली बार भगत ने देखो चैन से खाना खाया है ,
चिता जवानों की फिर से रंग दे बसंती गायेगी ,
शहीदों की माँ आज मुंडेर पे एक दीप जलायेगी ,
जंग खायी बंदूके देखो अपने रंग में आयी है ,
पहली बार भारत ने खुल कर गोलियां चलायी है ,
घनघोर तम से भरी हुई खत्म हुई वो रातें अब ,

2016-11-15

सर्जिकल दोहे

*सर्जिकल दोहे*

रहिमन कभी ना राखिये, काला धन छुपाए,
जाने कब मोदी बब्बा, सर्जिकल कर जाये...

हरे लाल सब नोट को, जोड़त बने अमीर,
एक रात में हो गए, राजा रंक फ़कीर...

नोटन की बोरी भरी, दिया कभी ना टैक्स,
रोते आज दहाड़ कर, कैसे करें रिलैक्स...

ब्लेक मनी की चाह में, भूल गए दिन रात,
एक चाल में मिल गयी, उनको शय और मात...

मेहनत का ही जोड़िये, कहे लक्ष्मीनारायण
समझ गए सो ठीक है,वरना नारायण नारायण ,,,..

😅😅😅😅😅

2016-11-08

हर दोस्त कमीना नहीं कोहिनूर होता है

Really Very Nice**
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Shayari Hi Shayari



जो चाहा
कभी पाया नहीं,
जो पाया
कभी सोचा नहीं,
जो सोचा
कभी मिला नहीं,
जो मिला
रास आया नहीं,
जो खोया
वो याद आता है,
पर जो पाया
संभाला जाता नहीं ,
क्यों
अजीब सी पहेली है ज़िन्दगी,
जिसको
कोई सुलझा पाता नहीं...
जीवन में
कभी समझौता करना पड़े
तो कोई बड़ी बात नहीं है,
क्योंकि,
झुकता वही है
जिसमें जान होती है,
अकड़ तो
मुरदे की पहचान होती है।
ज़िन्दगी जीने के

2016-11-03

सदा शाँत निर्भय सुंदर मेरा मध्यप्रदेश

म.प्र.के स्थापना दिवस ( १ नवम्बर) की सभी को बधाई !!

*मेरा मध्यप्रदेश*

ना दंगा ना आतंक ना ही कोई क्लेश है !
सदा शाँत निर्भय सुंदर मेरा
दो-दो ज्योर्तिलिंगो वाला
नर्मदा का जल मतवाला
इंदौर का सुंदर राजवाड़ा
संतो का निवास अखाड़ा
महेश्वर  की  साड़ी  सुंदर
भेड़ाघाट  में   कूदे  बंदर
बड़वानी  में  बावनगजा
बिजासन में लहराए ध्वजा

2016-10-24

बचपन वाली दिवाली

Veery Beautiful Lines by Gulzar Sahab

बचपन वाली दिवाली .....


हफ्तों पहले से साफ़-सफाई में जुट जाते हैं
चूने के कनिस्तर में थोड़ी नील मिलाते हैं
अलमारी खिसका खोयी चीज़ वापस  पाते हैं
दोछत्ती का कबाड़ बेच कुछ पैसे कमाते हैं
चलो इस दफ़े दिवाली घर पे मनाते हैं  ....

2016-10-04

तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ

*तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ*


सिंह की सवार बनकर
रंगों की फुहार बनकर
पुष्पों की बहार बनकर
सुहागन का श्रंगार बनकर
*तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ*
खुशियाँ अपार बनकर
रिश्तों में प्यार बनकर
बच्चों का दुलार बनकर
समाज में संस्कार बनकर
*तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ*
रसोई में प्रसाद बनकर
व्यापार में लाभ बनकर
घर में आशीर्वाद बनकर

2016-09-30

नाज हमें उन वीरों पर जो मान बड़ा कर आये


है नाज हमें उन वीरों पर,
                जो मान बड़ा कर आये हैं।
दुश्मन को घुसकर के मारा,
                शान बढ़ा कर आये हैं...।I
आस अब बड़ी वतन की,
                अरमान .बढ़ा कर  आये  हैं।
है नाज हमें उन वीरों पर,
                जो शान  बढ़ा कर आये हैं...।I
एक मरा तो सौ मारेंगे,
                अब  रीत  यही  बन  जाने  दो।

2016-09-21

आज उरी में फ़िर कुत्तों ने - कविता

जहाँ मिलें जिस जगह मिलें....
इनकी छाती ही फाड़ दो.....
आतंकी की देह में गहरे....
आज तिरँगा गाड़ दो....!
बहुत हो चुके शौकग्रस्त हम....
आज युद्ध की वेला है....
आज उरी में फ़िर कुत्तों ने....
खेल रक्त का खेला है...!
कब तक सैनिक वीर हमारे....
अपने प्राण गंवायेंगे....?
और तिरंगे में लिपटे...
कितने शव वापस आयेंगे....?
बहुत हुआ आतंक-नृत्य...
अब अन्तिम परदा गिरने दो....

2016-09-20

काग तुम आना ,छत की मुंडेर पे..

काग तुम आना ,
छत की मुंडेर पे..करना तुम काँव-काँव।
तुम लाना सन्देशा,
मेंरे पूर्वजों का।
उनको बतलाना हाल हमारा,
हमारे घर का।
उन तक पहुंचाना..मिठास,
खीर की..।
ये संदेसा देना कि,

2016-09-02

कान्हा की फरियाद व्हाट्सएप्पबहुत सतायो

कान्हा की फरियाद अपनी माँ से

मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो
सब ग्वाल बाल मिल जुल
नया ग्रुप बनायो

मईया मोरी व्हाट्सएप्प
बहुत सतायो


मैं सबसे छोटा सा बालक
    ग्रुप में जगह न पायो
सब बैठे चैटटिंग करते है
      मोसो गाय चरवायो
मईया मोरी व्हाट्सएप्प
     बहुत सतायो


बलदाऊ कहते है मुझसे
       बंसी मती बजायो
बंसी की धुन सुन सुन के
     रिंगटोन भूली जायो
मईया मोरी व्हाट्सएप्प
          बहुत सतायो

पति एक प्रेमी को नमन

संगिनी!/

सात फेरे जब लिए थे/
सात जन्मों के सफर तक/
एक जीवन चलो बीता/
साथ यद्यपि मध्य छूटा/
किन्तु छः है शेष अब भी/
तुम चलो आता हूँ मैं भी/
करके कुछ दायित्व पूरे/
हैं जो कुछ सपने अधूरे/
चल तुझे मैं छोड़ आऊँ/
देह हाथों में उठाकर/
टूट कर न हार कर/
धिक्कार है संसार पर/
तू मेरी है मैं तुझे ले जाऊँगा/

2016-08-21

पी. वी. सिंधु और साक्षी को समर्पित।

ओलम्पिक में पदक जीतने वाली पी. वी. सिंधु और साक्षी को समर्पित।




पूसारला वेंकट सिंधु एक भारतीय पेशेवर बैडमिंटन खिलाड़ी है। 2016 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में, वह पहली भारतीय महिला ओलंपिक रजत पदक जीतने वाली खिलाड़ी बन गयी हें


सिंधु तुमने मेडल जीता
देश झूम कर नाचा है
तुमने भ्रूण हत्यारों के

2016-08-20

हास्य कविता-अक्ल बाटने लगे विधाता

हास्य कविता  ****

अक्ल बाटने लगे विधाता,
             लंबी लगी कतारें ।
सभी आदमी खड़े हुए थे,
            कहीं नहीं थी नारें ।
सभी नारियाँ कहाँ रह गई.
          था ये अचरज भारी ।
पता चला ब्यूटी पार्लर में,
          पहुँच गई थी सारी।
मेकअप की थी गहन प्रक्रिया,
           एक एक पर भारी ।
बैठी थीं कुछ इंतजार में,
          कब आएगी बारी ।
उधर विधाता ने पुरूषों में,
         अक्ल बाँट दी सारी ।

2016-08-07

शहीद जवान के बच्चे की कविता

शहीद जवान के बच्चे की कविता दिल छू गई

ओढ़ के तिरंगा क्यों पापा आये है?
माँ मेरा मन बात ये समझ ना पाये है,
ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।
पहले पापा मुन्ना मुन्ना कहते आते थे,
टॉफियाँ खिलोने साथ में भी लाते थे।
गोदी में उठा के खूब खिलखिलाते थे,
हाथ फेर सर पे प्यार भी जताते थे।
पर ना जाने आज क्यूँ वो चुप हो गए,
लगता है की खूब गहरी नींद सो गए।
नींद से पापा उठो मुन्ना बुलाये है,
ओढ़ के तिरंगे को क्यूँ पापा आये है।
फौजी अंकलों की भीड़ घर क्यूँ आई है,
पापा का सामान साथ में क्यूँ लाई है।
साथ में क्यूँ लाई है वो मेडलों के हार ,

2016-07-31

मैं औऱ मेरी तनहाई

मैं औऱ मेरी तनहाई, अक्सर ये बाते करते हैं;

ज्यादा पीऊं या कम,
व्हिस्की पीऊं या रम;
या फिर तौबा कर लूं,
कुछ तो अच्छा कर लूं;
हर सुबह तौबा हो जाती है,
शाम होते होते फिर याद आती है;

2016-07-16

हमारे ज़माने में मोबाइल नही थे


चश्मा साफ़ करते हुए उस बुज़ुर्ग ने अपनी  पत्नी से कहा, हमारे ज़माने में मोबाइल  नही थे…! 

पत्नी : पर ठीक पाँच बजकर पचपन मिनीट पर में पानी का ग्लास लेकर दरवाज़े पे आती  और आप आ पहुँचते।

पति : हाँ मैंने तीस साल नौकरी की पर आज  तक में समझ नही पाया की, में आता इसलिए तुम पानी लाती। या तुम पानी लेकर आती इसलिये में आता था।

2016-07-14

अपनों के दिल मे रहना आना चाहिए.

बस अपनों के   दिल मे रहना  आना चाहिए...!

कुछ हँस के
     बोल दिया करो, कुछ हँस के
      टाल दिया करो,
यूँ तो बहुत
    परेशानियां है
तुमको भी
     मुझको भी,
मगर कुछ फैंसले
     वक्त पे डाल दिया करो,

2016-07-07

आजकल पराई दीवार पर कान कौन रखता है..

सुप्रभात मित्रो , 

पत्थरों के शहर में कच्चे मकान कौन रखता है.. 
आजकल AC के ज़माने में हवा के लिए रोशनदान कौन रखता है..

अपने घर की कलह से फुरसत मिले, तो सुने..
आजकल पराई दीवार पर कान कौन रखता है..
जहां, जब, जिसका, जी चाहा थूक दिया..

2016-06-19

तुमसे तन-मन मिले प्राण प्रिये

तुमसे तन-मन मिले प्राण प्रिय! सदा सुहागिन रात हो गई
Source-pinterest.com
होंठ हिले तक नहीं लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई
राधा कुंज भवन में जैसे
सीता खड़ी हुई उपवन में
खड़ी हुई थी सदियों से मैं
थाल सजाकर मन-आंगन में
जाने कितनी सुबहें आईं, शाम हुई फिर रात हो गई
होंठ हिले तक नहीं, लगा ज्यों जनम-जनम की बात हो गई
तड़प रही थी मन की मीरा
महा मिलन के जल की प्यासी