2015-06-14

बसना हो तो ह्रदय में बसो


एक दिन रुक्मणी ने भोजन के बाद श्री कृष्ण को दूध पीने को दिया।दूध ज्यदा गरम होने के कारण श्री कृष्ण के हृदय में लगा और उनके श्रीमुख से निकला हे राधे !

सुनते ही रुक्मणी बोली प्रभु! ऐसा क्या है राधा जी में ,जो आपकी हर साँस पर उनका ही नाम होता है।मैं भी तो आपसे अपार प्रेम करती हूँ; फिर भी आप हमें नहीं पुकारते।


श्री कृष्ण ने कहा -देवी!आप।कभी राधा से मिली हैं ?और मंद मंद मुस्काने लगे। अगले दिन रुक्मणी राधाजी से मिलने उनके महल में पहुंची ।


राधाजी के कक्ष के बाहर अत्यंत खूबसूरत स्त्री को देखा और उनके मुख पर तेज होने कारण उसने सोचा कि ये ही राधाजी है और उनके चरण छुने लगी; तभी वो बोली -आप कौन हैं ?


2015-06-13

उसकी शादी हो गयी है

उसका शरीर जर्जर है...
 लगता है लुटा लुटा सा..!
बाल भी बिखरे बिखरे हैं...
 लगता है पिटा पिटा सा...!
मस्तिष्क अस्त व्यस्त है...
 है कहीं खोया सा...!!!
जाग रहा है पर लगता है...
 जैसे वो सोया सा...!
लगता है तबियत उसकी..
 अब आधी हो गयी है...!
जी हाँ आप सही समझे
 उसकी शादी हो गयी है...!!

 

Why the Buddha Touched the Earth

The entire cosmos is a cooperative. The sun, the moon, and the stars live together as a cooperative. The same is true for humans and animals, trees, and the Earth. When we realize that the world is a mutual, interdependent, cooperative enterprise -- then we can build a noble environment. If our lives are not based on this truth, then we shall perish. --Buddhadasa Bhikkhu
 

2015-06-10

ध्यान का अर्थ

Meditation means
 
 
छोटी-सी दीखने वाली कथा जीवन का, साधना का सारा सार-संक्षिप्त लिए हुए है। वह सार-संक्षिप्त इतना ही है, कि यदि वासनाएं पूरी हो गई हों, यदि भोजन पूरा हो गया हो, तो अब थाली को धो डालो। अगर मन की दौड़ पूरी हो गई हो, तो अब मन को धो लो। अगर संसार में चलने की आकांक्षा भर गई हो, तो अब थाली को धो लो। इतना ही ध्यान का सार भी है।

 पहले हम ध्यान का अर्थ समझें और फिर वापिस कथा के अर्थ पर लौट आएं। ध्यान का अर्थ है: मन काम कर रहा है चौबीस घंटे, सतत। चाहे तुम जागो, चाहे तुम सोओ, चाहे तुम उठो, चाहे बैठो; चाहे श्रम करो, चाहे विश्राम; लेकिन मन निरंतर काम में लगा है। मन की थकान धूल की तरह इकट्ठी होती है। और मन की प्रत्येक क्रिया तुम्हारी चेतना को धुएं से भर जाती है। क्योंकि मन की क्रिया में भी ईंधन जलता है।

 

2015-06-09

सुन्दरकाण्ड - श्रीरामचरितमानस

सुन्दरकाण्ड
श्रीजानकीवल्लभो विजयते
श्रीरामचरितमानस
~~~~~~~~


पञ्चम सोपान
सुन्दरकाण्ड
श्लोक





शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं
ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् ।

रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं
वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूड़ामणिम्।।1।।

नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये
सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा।
भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मे
कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च।।2।।

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।3।।

जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए।।
तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुख कंद मूल फल खाई।।

जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी।।
यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा। चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा।।

सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर।।
बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी।।

जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।
जिमि अमोघ रघुपति कर बाना। एही भाँति चलेउ हनुमाना।।

जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रमहारी।।

दो0- हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम।।1।।

–*–*–

जात पवनसुत देवन्ह देखा। जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा।।
सुरसा नाम अहिन्ह कै माता। पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता।।

आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा। सुनत बचन कह पवनकुमारा।।
राम काजु करि फिरि मैं आवौं। सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं।।

तब तव बदन पैठिहउँ आई। सत्य कहउँ मोहि जान दे माई।।
कबनेहुँ जतन देइ नहिं जाना। ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना।।

जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा। कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा।।
सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ। तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ।।

जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा। तासु दून कपि रूप देखावा।।
सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा। अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा।।

बदन पइठि पुनि बाहेर आवा। मागा बिदा ताहि सिरु नावा।।
मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा। बुधि बल मरमु तोर मै पावा।।

दो0-राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।
आसिष देह गई सो हरषि चलेउ हनुमान।।2।।

–*–*–

निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।
जीव जंतु जे गगन उड़ाहीं। जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं।।

गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।
सोइ छल हनूमान कहँ कीन्हा। तासु कपटु कपि तुरतहिं चीन्हा।।

ताहि मारि मारुतसुत बीरा। बारिधि पार गयउ मतिधीरा।।
तहाँ जाइ देखी बन सोभा। गुंजत चंचरीक मधु लोभा।।


माँ पीताम्बरा शक्ति पीठ, दतिया मध्य प्रदेश

माँ पीताम्बरा शक्ति पीठ, दतिया मध्य प्रदेश : माँ बगलामुखी शक्ति पीठ 

जय माँ सदा सहाय 

म.प्र. में दतिया जिले में सिथत मा पीताम्बरा का शक्तिपीठ भारत में अद्वितीय है और इसकी समानता कामाख्या मंदिर से ही की जा सकती है। इस शकित पीठ में मा बगलामुखी देवी का विशाल रूप स्थापित है जिसके संबंध में ऐसी जन मान्यता है कि मा बगलामुखी के परिसर में प्रवेश करने से श्रद्धालु भक्त के संकट स्वमेव दूर हो जाते हैं एवं मंदिर परिसर में धर्म प्रेमियों के रूकने की व्यवस्थाएं हैं इसके अलावा झांसी रेलवे स्टेशन से दतिया की दूरी मात्र 28 कि.मी. है और वायुयान से ग्वालियर समीपस्थ हवार्इ अडडा है।

धार्मिक अनुष्ठान और कार्यसिद्धी योग की पूर्ति हेतु देश और प्रदेश के उधोगपति और राजनेता निरन्तर दतिया सिथत इस शक्तिपीठ में आते हैं।

भारत के लोकप्रिय शक्तिपीठों में से एक है, जो मध्य प्रदेश में स्थित है।  मुकदमे आदि के मामले में पीताम्बरा देवी का अनुष्ठान सफलता प्राप्त करने वाला माना जाता है। मध्य प्रदेश राज्य ज़िला दतिया निर्माण काल 1935 प्रसिद्धि शक्तिपीठ संबंधित लेख मध्य प्रदेश , दतिया , शक्तिपीठ विशेष पीताम्बरा पीठ के प्रांगण में ही 'माँ धूमावती देवी' का मन्दिर है, जो भारत में भगवती धूमावती का एक मात्र मन्दिर है।


Climb the Mountain with the Intention to See the World

A German once visited a temple under construction where he saw a sculptor making an idol of God...
Suddenly he noticed a similar idol lying nearby...

Surprised, he asked the sculptor, "Do you need two statues of the same idol?"
"No," said the sculptor
without looking up, "We need only one, but the first one got damaged at the last stage..."


खेड़ापति हनुमान मंदिर ग्वालियर

श्री खेड़ापति जी हनुमान मंदिर ग्वालियर

खेड़ापति हनुमान मंदिर ग्वालियर की 250 वर्ष पुरानी हनुमान जी की प्रतिमा आश्चर्यजनक रूप से अपना असली रूप छोड़कर बाल रूप में आ गई।

भारत के मध्य प्रदेश राज्यान्तर्गत ग्वालियर पुरातन काल से गालव ऋषि की तपोभूमि रहा है। यहां पर संकटमोचन सिद्ध श्री खेड़ापति जी हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर की मान्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की सुबह 4.00 बजे से ही यहां भक्त दर्शनों के लिए आना शुरू कर देते है और देर रात तक यह कार्यक्रम चलता रहता है। 

भारत की संस्कृति को पहचाने

अपनी भारत की संस्कृति को पहचाने.
1.   दो पक्ष-
कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !

2.   तीन ऋण -
देव ऋण , 
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !

3.  चार युग -
सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !

4.  चार धाम -
द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !

5.  चारपीठ -
शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !

Paramahansa on the ship to America


I GO TO AMERICA

“America! Surely these people are Americans!” This was my thought as a panorama of Western faces passed before my inward view.*

[*Many of those faces I have since seen in the West, and instantly recognized.]

Immersed in meditation, I was sitting behind some dusty boxes in the storeroom of the Ranchi school. ** A private spot was difficult to find during those busy years with the youngsters!

श्री चिंताहरण गणेश मंदिर उज्जैन


श्री चिंताहरण गणेश मंदिर उज्जैन।

ऐसा माना जाता है कि राजा दशरथ के उज्जैन में पिण्डदान के दौरान भगवान श्री रामचन्द्र जी ने यहां आकर पूजा अर्चना की थी।

उज्जैन से करीब 6 किलोमीटर दूर भगवान श्री गणेश के तीन रूप एक साथ विराजमान है, जो चितांमण गणेश, इच्छामण गणेश और सिद्धिविनायक के रूप में जाने जाते है। श्री चिंताहरण गणेश जी की ऐसी अद्भूत और स्वयंभू अलोकिक प्रतिमा देश में शायद ही कहीं होगी। भक्त की इच्छा पूर्ण करने वाले, इच्छामण, सिद्धि देने वाले सिद्धिविनायक के साथ समस्त चिंता को दूर करने वाले चिंतामण गेणेश जी विराजमान है। इनका श्रृंगार सिंदूर से किया जाता है। श्रृंगार से पहले दूध और जल से इनका अभिषेक किया जाता है और विशेष रूप से मोदक एवं मोतीचूर के लड्डू का भोग इन्हें लगाया जाता है जो इन्हें अत्यन्त प्रिय है।

2015-06-08

7th CPC joint draft memorandum on dt 08April2015

7th CPC joint draft memorandum submitted on dtd 08/04/2015 by the member of CPC from  DOPT, MHA, MEA and DS&T etc with recommendations to implement w.e.f. 1st January 2016.  

                         

Member (attached 26 pages report) Pay scale are calculated on the basis of pay drawn in PB including GP multiply by the factor 2.15 and new basic pay will be (old PB+GP)*2.15 (.) Pension and family pension multiply factor should be 2.50.   

Member (attached 14 pages report) annual rate of increment divided  into five categories(A) 2500 for fixed basic (B) 1500 for class 1(C) 1200 for class 2 (D) 1000-Group A,800-Group B,600-Group C for class 3 (E) 400 for class 4 annually.                             

Member(attached 32 pages report) The present MACPs scheme should be replaced by giving 4 up gradation after completion of 10,18,25,30 years of continues service.               

Member (attached 28 pages report) house rent allowance should be as it was in 6th CPC and date of increment should be 1st January in place of 1st July w.e.f. 01-01-2016 and house building advance should be 50 times of new basic pay.                                      

ख़ुद मिटे तो वो मिले

ख़ुद मिटे तो वो मिले
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
बुद्ध के जीवन में उल्लेख है : एक गांव में यज्ञ हो रहा है और गांव का राजा एक बकरे को बलि चढ़ा रहा है। बुद्ध गांव से गुजरे हैं, वे वहां पहुंच गए। और उन्होंने उस राजा से कहा कि यह क्या कर रहे हैं? इस बकरे को चढ़ा रहे हो? , किसलिए? तो उसने कहा कि इसके चढ़ाने से बड़ा पुण्य होता है। तो बुद्ध ने कहा, मुझे चढ़ा दो तो और भी ज्यादा पुण्य होगा। वह राजा थोड़ा डरा। बकरे को चढ़ाने में कोई हर्जा नहीं, लेकिन बुद्ध को चढ़ाना! उसके भी हाथ-पैर कंपे।