2015-06-08

भोजन के साथ बेहोशी क्यों आ जाती है?

भोजन के साथ बेहोशी क्यों आ जाती है? 

क्योंकि जैसे ही पेट में भोजन जाता है, मस्तिष्क में जो ऊर्जा साधारणतः काम करती है--जो शक्ति, वह पेट खींच लेता है।
 
क्योंकि पेट को पचाने की जरूरत पड़ती है, तो सारे शरीर से शक्ति को पेट खींच लेता है 
क्योंकि भोजन को पचाना है, पेट की अग्नि को ठीक से जलना है।

और मस्तिष्क बड़ी सूक्ष्म शक्ति से चलता है। होश सूक्ष्मतम शक्ति है।
 
जैसे ही पेट में भोजन गया कि मस्तिष्क की शक्ति पेट की तरफ उतर जाती है। बस, सिर झपकी खाने लगता है, नींद आने लगती है। 

2015-06-03

आत्म हत्या

एक युवक आत्म हत्या के लिए जा रहा था ,शायद जीवन से उसका मोह भगं हो चुका था जैसे कि हमारे तथा कथित धार्मिक लोग है जो मोक्ष और मूक्ति के चक्कर मे जीवन से मूहं मोढे बैठे है ,दरिया मे कुदने ही वाला था कि एक सन्यासी ने उसका हाथ पकड लिया ,शायद वो साक्षात ईश्वर ही होगा उसके लिए। उसने कहा आप मुझे मर जाने दे मै अब नही जीना चाहता जीवन ने मेरे साथ बहूत अन्याय किया है मेरा भगवान से इन्सानियत से भरोसा उठ गया है , कुछ भी तो नही दिया मुझे ईश्वर ने अनाथालय मे पला हू , वहा शोषन हुआ है तो भाग आया हूं , न मे पडना लिखना जानता हूं , न जेब मे फूटी कोढी है भीख भी कोइ नही देने को राजी । सब तरफ अन्धेरा है क्या करूगां जी कर , मरना सबसे उतम है मेरी स्थिति मे । 

जीवन का राज

एक सूफी फकीर के पास एक युवक आया और उस युवक ने कहा कि क्या आप मुझे जीवन का राज समझाएंगे? मैं बहुत गुरुओं के पास गया हूं बहुत ठोकरें खाई हैं दर—दर की, बहुत धूल फांकी है राहों की; मगर कोई मुझे जीवन का राज नहीं समझा सका। और जिसने जो कहा वही मैंने किया। किसी ने कहा उलटे खड़े होओ तो उलटा खड़ा हुआ। किसी ने कहा यह मत खाओ तो वह नहीं खाया। किसी ने कहा ऐसे सोओ तो ऐसे सोया। पता नहीं कितनी—कितनी कवायदें करके आया हूं थक गया हूं! आपका किसी ने पता दिया तो आपके पास आ गया। जीवन का राज आप मुझे बताएंगे?


कैसे बदलें Negative Thoughts को Positive में ? 

कैसे बदलें Negative Thoughts को Positive में ? 

Law Of Attraction (LOA) कहता है कि हम जो भी सोचते हैं उसे अपने जीवन में आकर्षित करते हैं, फिर चाहे वो चीज अच्छी हो या बुरी।
 
उदाहरण के लिए: अगर कोई सोचता है कि वो हमेशा परेशान रहता है, बीमार रहता है और उसके पास पैसों कि कमी रहती है तो असल जिंदगी में भी ब्रह्माण्ड घटनाओं को कुछ ऐसे सेट करता है कि उसे अपने जिंदगी में परेशानी, बीमारी और तंगी का सामना करना पड़ता है।
 
वहीँ दूसरी तरफ अगर वो सोचता है कि वो खुशहाल है, सेहतमंद है और उसके पास खूब पैसे हैं तो LOA कि वजह से असल जिंदगी में भी उसे खुशहाली, अच्छी सेहत और समृद्धि देखने को मिलती है।
 
“हम जो सोचते हैं, वो बन जाते हैं” 


2015-06-01

कैसे पेट्रोल पंप वाले डालते है कम पेट्रोल

कैसे पेट्रोल पंप वाले डालते है आपकी गाडी में कम पेट्रोल – जानकर चौंक पड़ेंगे आप

कैसे चोरी होता है पेट्रोल, कैसे लगती है आपकी जेब पर चपत, समझिए -


हमें  काफी दिनों से पेट्रोल पम्पो द्वारा कम पेट्रोल डाले जाने की सूचनाये मिल रही थी,लेकिन ये बात समझ में नही आ पा रही थी की जब मीटर चलता है तो ये पेट्रोल पंप वाले कम पेट्रोल कैसे डाल देते है इसी उधेड़बुन को लेकर हमारा  एक रिपोर्टर पेट्रोल पम्प पर पेट्रोल डलवाने गया जहाँ से ये शिकायते आ रही थी.

पढ़िए रिपोर्टर की ज़ुबानी 

गायत्री मंत्र कब ज़रूरी है

गायत्री मंत्र कब  ज़रूरी है

☀सुबह उठते वक़्त 8 बार ❕✋✌❕अष्ट कर्मों को जीतने के लिए !!
 भोजन के समय 1 बार❕❕ अमृत समान भोजन प्राप्त होने के लिए  !!                         
 बाहर जाते समय 3 बार ❕✌❕समृद्धि सफलता और सिद्धि के लिए    !!  
 मन्दिर में 12 बार ❕✌❕
प्रभु के गुणों को याद करने के लिए !!      
छींक आए तब गायत्री मंत्र  उच्चारण ☝1 बार  अमंगल दूर करने के लिए !!
                                        
सोते समय  7 बार  ❕✋✌ ❕सात प्रकार के भय दूर करने के लिए !!                                 


!!!ॐ , ओउम् तीन अक्षरों से बना है।
अ उ म् ।
"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,
"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,

खुश हूँ

।। खुश हूँ ।।
             
"जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश हूँ,
"काम में खुश हूँ," आराम में खुश हूँ।

"आज पनीर नहीं," दाल में ही खुश हूँ,
"आज गाड़ी नहीं," पैदल ही खुश हूँ।

"दोस्तों का साथ नहीं," अकेला ही खुश हूँ,
"आज कोई नाराज है," उसके इस अंदाज से ही खुश हूँ।

जल्दबाजी क्यों

दुनिया शांत थी। बड़े धीरज से चल रही थी। रफ्तार नहीं थी, तनाव नहीं था, जल्दबाजी नहीं थी कहीं पहुंचने की, लौटने की भी कोई जल्दी न थी। जैसे समय काफी था, पर्याप्त था। सब समय में हो जाएगा। जितनी रफ्तार बढ़ती है, जितनी स्पीड बढ़ती है, उतना तुम्हारा तनाव बढ़ता है। क्योंकि रफ्तार के साथ तुम जल्दबाज होते चले जाते हो। एक-एक मिनिट की फिक्र है कि खो न जाए!

2015-05-31

मुहावरो के आधुनिक अर्थ

मुहावरो के आधुनिक अर्थ...

1. खुद की जान खतरे में डालना = शादी करना
2. आ बैल मुझे मार = पत्नी से पंगा लेना
3. दीवार से सर फोड़ना = पत्नी को कुछ समझाना
4. चार दिन की चांदनी वही अँधेरी रात = पत्नी का मायके से वापस आना
5. आत्म हत्या के लिए प्रेरित करना = शादी की राय देना
6. दुश्मनी निभाना = दोस्तों की शादी करवाना
7. खुद का स्वार्थ देखना = शादी ना करना
8. पाप की सजा मिलना = शादी हो जाना
9. लव मैरिज करना = खुद से युद्ध करने को योद्धा ढूंढना
10. जिंदगी के मज़े लेना = कुँवारा रहना
11. ओखली में सिर देना = शादी के लिए हाँ करना

एक रूपये किलो चावल

1 रूपये  किलो चावल योजना
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में
दिन-ब-दिन लोकप्रिय
होती जा रही है..
लोकप्रियता के कारणों का विश्लेषण प्रस्तुत है..

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30 kg चावल खरीदिये
₹ 30 रूपये में,

पालीथीन का स्वास्थ्य पर असर

एम्स ने कैंसर होने के कारण बतायें है:-

पालीथीन मे गरम सब्जी भी पैक ना करवाए।
1.चाय कभी भी प्लास्टिक के कप में न लें।
2.कोई भी गरम चीज प्लास्टिक में न लें खासकर भोजन।
3. खाने कीf चीजों को माइक्रोवेव में प्लास्टिक के बर्तन में गर्म न करें।

पति की पुरानी गर्ल फ्रेंड

पति की पुरानी गर्ल फ्रेंड 

एक दिन दफ्तर से घर आते हुए पुरानी गर्ल फ्रेंड से
भेट हो गयी
और जो बीवी से मिलने की जल्दी थी वह ज़रा से
लेट हो गयी
जाते ही बीवी ने आँखे दिखाई -आदतानुसार हम पर
चिल्लाई
तुम क्या समझते हो मुझे नहीं है किसी बात का इल्म
जरुर देख रहे होगे तुम सक्रेटरी के साथ कोई फिल्म
मैंने कहा – अरी पगली, घर आते हे ऐसे
झिडकियां मत दिया कर
कभी तो छोड़ दे, मुझ बेचारे पर इस तरह शक मत
किया कर
पत्नी फिर तेज होकर बोली – मुझे बेवकूफ बना रहे हो
6 बजे दफ्तर बंद होता है और तुम 10 बजे आ रहे हो
मैंने कहा अब छोड़ यह धुन – मेरी बात ज़रा ध्यान से सुन
एक आदमी का एक हज़ार का नोट खो गया था

2015-05-30

29 cities upgraded for higher HRA and Transport Allowance

29 cities upgraded for higher HRA & Transport Allowance

30 May, 2015 

The Union Cabinet today approved up-gradation of 29 cities and towns on the basis of 2011 population census for providing higher house and transportation allowance to central government employees.


The revised classification of cities would be effective from April 1, 2014 and cost the exchequer approximately Rs 128 crore for 2014-15.