2015-01-07

मुश्किल है अपना मेल प्रिये

हास्य कविता - मुश्किल है अपना मेल प्रिये--- -

ये प्यार नहीं है खेल प्रिये

तुम एम.ए. फर्स्ट डिवीजन हो ---- मैं हुआ मैट्रिक फेल प्रिये
तुम फौजी अफसर की बेटी---- मैं तो किसान का बेटा हूं
तुम रबडी खीर मलाई हो----मैं तो सत्तू सपरेटा हूं
तुम ए.सी. घर में रहती हो---- मैं पेड. के नीचे लेटा हूं
तुम नई मारूति लगती हो----मैं स्कूटर लम्ब्रेटा हूं

बड़ा महत्व है

बड़ा महत्व है


बड़ा महत्व है एक बार पढ़ के तो देखो
ससुराल में साली का
बाग़ में माली का
होंठो में लाली का
पुलिस में गाली का
मकान में नाली का
कान में बाली का
पूजा में थाली का
खुशी में ताली का------बड़ा महत्व है
फलों में आम का
भगवान में राम का
मयखाने में जाम का
फैक्ट्री में काम का
सुर्ख़ियों में नाम का
बाज़ार में दाम का

2015-01-06

वेद ज्ञान

वेद – ज्ञान
वेद  हमारे धर्मग्रन्थ हैं ।


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वेद संसार के पुस्तकालय में सबसे प्राचीन ग्रन्थ हैं । वेद का ज्ञान सृष्टि के आदि में परमात्मा ने अग्नि , वायु , आदित्य और अंगिरा – इन चार ऋषियों को एक साथ दिया था । वेद मानवमात्र के लिए हैं ।


वेद चार हैं ----

कब्ज का उपचार

.कब्ज का उपचार

।। ॐ ।। आरोग्यं  ।। ॐ ।।

कब्ज दूर करने के कुछ नुश्खे लोकोक्तियों के द्वारा बताये गये हैं:

हर्र बहेड़ा, आंवला भाग एक दो चार।
तीनों औषधि लीजिये, त्रिफला कहे विचार।

अर्थात: एक भाग हैड, दो भाग बड़ी हैड और चार भाग आंवला तीनों को मिला कर पीस लें।


इस योग को त्रिफला कहा जाता है। नित्य रात्रि में गर्म पानी से एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन करने से पेट निरोगी रहता है। कब्ज को दूर करता है।

राम दुबारा मत आना

राम दुबारा मत आना, अब यहाँ लखन हनुमान नहीं,




राम दुबारा मत आना, अब यहाँ लखन हनुमान नहीं,
90 करोड़ इन मुर्दों में, अब बची किसी में जान नहीं,
भाई भाई के चक्कर में अब, अपनी बहनों का ज्ञान नहीं,
हम कैसे कह दें कि हिंदू अब, राम की संतान नहीं,
इतिहास भी रो कर शांत हो गया, भगवा पर अभिमान नहीं,

कहानी एक कम्बल

कहानी एक कम्बल


सर्दियों के मौसम में एक बूढी औरत अपने घर के कोने में ठंड से तड़फ रही थी।।
जवानी में उसके पति का देहांत हो गया था
घर में एक छोटा बेटा था, उस बेटे के उज्जवल भविष्य के लिए
उस माँ ने घर-घर जाकर काम किया
काम करते-2 वो बहुत थक जाती थी,
लेकिन फिर भी आराम
नही करती थी वो सोचती थी जिस
दिन बेटा लायक हो जाएगा उस दिन आराम करूंगी।।
..
देखते-2 समय बीत गया!
माँ बूढी हो गयी और बेटे
को अच्छी नौकरी मिल गयी।
कुछ समय बाद बेटे की शादी कर
दी और एक बच्चा हो गया।
अब बूढी माँ खुश थी कि बेटा लायक
हो गया

2015-01-05

जीवन के फिलासफे

जीवन के फिलासफे

जीवन के बारे मे लिखी हुयी ये बातें हमनें अलग अलग सुनी या पढी हैं । उनमे से खुछ यहाँ उद्धरत है ।




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मनुष्य सुबह से शाम तक काम करके उतना नहीं थकता;
जितना क्रोध और चिंता से एक क्षण में थक जाता है।

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ईश्वर का दिया कभी अल्प नहीं होता;
जो टूट जाये वो संकल्प नहीं होता;
हार को लक्ष्य से दूर ही रखना;
क्योंकि जीत का कोई विकल्प नहीं होता।

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जिंदगी में दो चीज़ें हमेशा टूटने के लिए ही होती हैं:
"सांस और साथ"
सांस टूटने से तो इंसान एक ही बार मरता है;
पर किसी का साथ टूटने से इंसान पल- पल मरता है।
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जीवन का सबसे बड़ा अपराध -
किसी की आँख में आंसू आपकी वजह से होना। 
और 
जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि -
किसी की आँख में आंसू आपके लिए होना।

कुत्ते की दया

कुत्ते की दया 



एक घर के सामने सडक बन रही थी,
गरीब मजदूरिन वहाँ काम कर रही थी.
मजदूरिन के घर का सारा बोझ उसी पर पडा था,
उसका नन्हा सा बच्चा साथ ही खडा था.
उसके घर के सारे बर्तन सूखे थे,
दो दिन से उसके बच्चे भूखे थे.
बच्चे की निगाह सामने के बँगले पर पडी,
घर की मालकिन, हाथ मे रोटी लिये खडी.

खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की

खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की ।




खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की।

आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है।

अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे।

क्यों की जीसकी जीतनी जरुरत थी ।

2015-01-04

फर्क सिर्फ इतनासा था

फर्क सिर्फ इतनासा था।

तेरी डोली उठी, मेरी अर्थी उठी
फूल तुझपरभी बरसे, फूल मुझपरभी बरसे
फर्क सिर्फ इतनासा था।
तू सज गयी, मुझे सजाया गया ।

तू भी घरको चली, मै भी घरको चला
फर्क सिर्फ इतनासा था।
तू उठके गयी, मुझे उठाया गया ।


नजरिया

नजरिया

एक बुजुर्ग ने एक दीवार पर एक बडा सा सफेद पेपर चिपकाया ! फिर उस पर मार्कर से एक काला ङाॅट बनाया !
ओर लोगों से पुछा तुम्हें क्या दिखाई दे रहा है !
लोग बोले काला ङाॅट

अकड़ तो मुरदे की पहचान होती है - कविता



जो चाहा कभी पाया नहीं,
जो पाया कभी सोचा नहीं,
जो सोचा कभी मिला नहीं,
जो मिला रास आया नहीं,
जो खोया वो याद आता है
पर

मन की बात

मन की बात
आज न जाने क्यूँ मन कुछ उचट सा गया है।
आत्म मंथन की खातिर दिल मचल सा गया है।

सैंकडो मील दूर बैठे किसी इंसान के Last seen at…
की हमें खबर है ,
मगर अपने ही घर के किसी कमरे में बैठे बूढे पिता जी को कब देखा था……याद नहीं।

हमारे बुज़ुर्ग माता-पिता कई बार हमें करीब से निहार कर अपने कमरे में चले जाते है,
और हम अपने स्मार्ट फ़ोन में नजरें गडाए उन्हें नजर अंदाज कर देते है।