2016-09-25

आयुर्वेद में वटी के उपयोग

निरोगी काया अनमोल रत्न

आयुर्वेद में वटी के उपयोग



व्योषादी वटी
यह वटी गले और कंठ की बीमारियों में जैसे गले की खराश, गले में हो रही खुजली, टॉन्सिल और अन्य गले की समस्याओं में लाभदायक है। इस वटी को दिन में कही बार चूस सकते है जिससे गले की समस्या में तुरंत राहत मिलेगी। 

विषमुष्टियादि वटी
इस वटी का उपयोग अग्नि बढ़ाने वाली, पाचन में उपयोगी है साथ ही साथ वात लक्षण से बुखार आया हो जिससे पेट में कब्ज है या पेट साफ ना होता हो तो यह वटी गुणकारी है। यह वटी  उदर शूल, स्नायु की दुर्बलता, गठिया, जोड़ो का दर्द, वात रोग में लाभदायक है। इस वटी को आवष्यकता नुसार १-1 या फिर २-२ सुबह शाम गुनगुने पानी के साथ भोजन के १० मिनट बाद दे सकते है। 


शिलाजित्वादि वटी

यह आयुर्वेद विज्ञान की शास्त्रोक्त औषधि है जिसे कई रोगों में इस्तेमाल किया जाता है जैसे बुखार, कुष्ट रोग, पाण्डु रोग, आखो के आगे अँधेरा आना, भगन्दर, स्वप्नदोष, रक्त पित्त और रक्त प्रदर जैसी समस्याओं में लाभकारी है। इस वटी को १-1 या फिर २-२ सुबह शाम दूध के साथ भोजन के १० मिनट बाद दे सकते है।

सर्पगन्धाघन वटी


यह वटी उच्च रक्तचाप के लिए कारगर है उसी तरह जिन्हे नींद नहीं आती, सोने में परेशानी होती है, चिंता, मानसिक तनाव रहता हो, जिन्हे अधिक ज्यादा ग़ुस्सा आता हो उन के लिए यह वटी वरदान है। उच्च रक्तचाप वालो को यह वटी रात को सोते समय २ वटी दूध के साथ लेना चाहिए और जिन्हे मानसिक तनाव, चिंता रहती हो उन्हें १ वटी कहानी चाहिए।

कुटज घन वटी

इस वटी का उपयोग कोलायटिस, पतले दस्त, आव आना, आंतो के सभी प्रकार के दोष, भगन्दर, बवासीर, गैस्ट्रिक अल्सर में काफी फायदेमंद है। इस वटी को सुबह २ और शाम को २ पानी के साथ खाना खाने के बाद देना है। इस वटी के साथ परहेज अगर करे तो जल्द ही फायदा होगा। 

चन्द्रप्रभा वटी
यह वटी मूत्राशय सम्बंधित सभी बीमारियों के लिए उपयोगी है। नेत्र रोग, पाण्डु रोग, श्वास रोग, भगन्दर, दन्त रोग, कुष्ट रोग, मासिक धर्म में पीड़ा आदि रोगों में भी उपयोग किया जाता है। इस वटी को सुबह शाम १-१ देनी है।

अर्शोघनी वटी
यह वटी बिना खून वाली बवासीर, खून वाली बवासीर को ठीक करने के लिए दी जाती है। इस की २-२ गोली दिन में चार बार ठन्डे ताजा पानी के साथ दे सकते है। 

आरोग्यवर्धिनी वटी
इस वटी का जैसा नाम वैसा काम है। यह लीवर से सम्बंधित रोग, त्वचा रोग, एलर्जी, सफ़ेद काले धब्बे, खाज-खुजली, एसिडिटी, पेट और अंतड़ियों सम्बंधित रोग, डायरिया, गैसेस, कोई भी शारीरिक समस्या में प्रयोग कर सकते है। इस की एक वटी सुबह के नाश्ते के २० मिनट बाद ले सकते है।

नोट : यह सभी वटिया आप को आयर्वेद की दुकान में पंसारी के यहाँ या फिर मेडिकल स्टोर में मिल जाएगी। आप बैधनाथ, हिमालया, केरला कंपनियों की वटी इस्तेमाल कर सकते है। 

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