2015-02-21

माँ की ममता की छाया - कविता

मेरे आते ही तेरा मुश्कुराना याद है 

वो रोते रोते तुझसे लिपट जाना याद है

तेरे हाथों में माँ जादू रहा मीठा कोई 
वो अपने हाथों से मुझको खिलाना याद है

तेरा दर छोड़ा मैंने जब पढ़ाई के लिये 
मैं खुद भी रोया माँ तुझको रुलाना याद है


मेरे गम अपने आँचल में छुपा तुमने रखे 
मेरी खुशियों में तेरा खिलखिलाना याद है

मेरे यारों ने मुझको नाम तो नए नए दिए 
माँ तेरा वीरा कह मुझको बुलाना याद है

मैं तो रूठा हूँ माँ हर बार गलती में मेरी 
वो गोदी में बैठा फिर भी मनाना याद है

मैं रब से ये मांगू सबको मिले माँ इधर पे 
उसकी जन्नत में वो गुजरा जमाना याद है

उसकी ममता की छाया दीप किस्मत से मिले 
मैं तो सोया हूँ पर उसको जगाना याद है

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