2015-03-05

बादशाह वजीर और फल - कहानी

बादशाह वजीर और फल - ये कहानी एक जीवन उपयोगी सन्देश देती है 


      समझने वालों के लिऐ,,,

एक  बादशाह ने एक दिन अपने  3 वज़ीरों को दरबार में  बुलाया, और  तीनो  को  हुक्म  दिया  के  एक  एक  थैला  ले  कर  बगीचे  में  जाएं ..,
और 
वहां  से  अच्छे  अच्छे  फल  (fruits ) जमा  करें .  

 वो  तीनो  अलग  अलग 
बाग़  में  दाखिल  हो  गए ,

एक - पहले  वज़ीर  ने  कोशिश  की  के  बादशाह  के  लिए  उसकी पसंद  के  अच्छे  अच्छे  और  मज़ेदार  फल  जमा  कराय , उस ने  काफी  मेहनत  के  बाद  बेहतरीन  और  ताज़ा  फलों  से  थैला  भर  लिया ,

दो - दूसरे  वज़ीर  ने  सोचा  बादशाह  हर  फल  का  जायज़ा  तो  नहीं  लेगा , इस  लिए  उसने  जल्दी  जल्दी  थैला  भरने  में  ताज़ा , कच्चे , गले  सड़े फल  भी  थैले  में  भर  लिए ,

तीन - तीसरे  वज़ीर  ने  सोचा  बादशाह  की  नज़र  तो  सिर्फ  भरे  हुवे थैले  की  तरफ  होगी  वो  खोल  कर  देखेगा  भी  नहीं  के  इसमें  क्या  है , उसने  वक़्त  बचाने  के  लिए  जल्दी  जल्दी  इसमें  घास , और  पत्ते  भर  लिए  और  वक़्त  बचाया .

 दूसरे  दिन  बादशाह  ने  तीनों  वज़ीरों  को  उनके  थैलों  समेत  दरबार  में  बुलाया  और  उनके  थैले  खोल  कर  भी  ना देखे  और  हुक्म  दिया  के , तीनों  को  उनके  थैलों  समेत  दूर  दराज़  जेल  में  (३)  महीने  क़ैद  कर  दिया  जाए .

अब  जेल  में  उनके  पास  खाने  पीने  को  कुछ  भी  नहीं  था  सिवाए  उन  थैलों  के , तो  जिस  वज़ीर  ने  अच्छे  अच्छे  फल  जमा  किये  वो  तो  मज़े  से  खाता  रहा  और  3 महीने  गुज़र  भी  गए , फिर  दूसरा  वज़ीर  जिसने  ताज़ा , कच्चे  गले  सड़े  फल  जमा  किये  थे,,


कुछ  दिन  तो  ताज़ा  फल  खाता  रहा  फिर  उसे  ख़राब  फल  खाने  पड़े , जिस  से  वो  बीमार  हो गया  और  बोहत  तकलीफ  उठानी  पड़ी . और  तीसरा  वज़ीर  जिसने  थैले  में  सिर्फ  घास  और  पत्ते  जमा  किये  थे  वो  कुछ  ही  दिनों  में  भूख  से  मर  गया .


 अब  आप  अपने  आप  से  पूछिये  के  आप  क्या  जमा  कर  रहे  हों   ?? आप  इस  वक़्त "बाग़"  में  हैं , जहाँ  चाहें  तो  नेक कर्म करे और नेकी जमा करें ..

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