2015-03-13

विदुर नीति के चार महत्वपूर्ण बिन्दु

विदुर नीति (Vidur Policy)



विदुर नीति

महाभारत कथा  में पांडवो के काकाश्री विदुर जी  का विशेष स्थान है। विदुर हस्तिनापुर राज्‍य के शीर्ष स्‍तंभों में से एक अत्‍यंत नीतिपूर्ण, न्‍यायोचित सलाह देने वाले माने गए है। वे जो सलाह देते थे, उसमें संपूर्ण मनुष्‍य जाति का भला छिपा होता था। उन्‍हीं की इन सलाहों को विदुर नीति के नाम से जाना जाता है। उनकी नीतियों में से कुछ निम्न हैं जिनके उपयोग से जीवन को सुखी एवं समृद्ध बनाया जा सकता है ।

  • अपना और जगत का कल्याण अथवा उन्नति चाहने वाले मनुष्य को तंद्रा, निद्रा, भय, क्रोध, आलस्य और प्रमाद। यह छह दोष हमेशा के लिए त्याग देने चाहिए।
  • क्षमा को दोष नहीं मानना चाहिए, निश्चय ही क्षमा परम बल है। क्षमा निर्बल मनुष्यों का गुण है और बलवानों का क्षमा भूषण है।
  • काम, क्रोध और लोभ यह तीन प्रकार के नरक यानी दुखों की ओर जाने के मार्ग है। यह तीनों आत्मा का नाश करने वाले हैं, इसलिए इनसे हमेशा दूर रहना चाहिए।
  • ईर्ष्या, दूसरों से घृणा करने वाला, असंतुष्ट, क्रोध करने वाला, शंकालु और पराश्रित (दूसरों पर आश्रित रहने वाले) इन छह प्रकार के व्यक्ति सदा दुखी रहते हैं।


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