2015-03-16

नवब्याहता बेटी की पाती

*एक नवब्याहता बेटी की पाती , पिता को "मन की बात "                      ********************************************************

मेरे बाबुल मैँ  हूँ तेरी लाड़ली,तेरे आँगन में पली बडी ।
मेरे विवाह में झूठी शानो शौकत दिखाने ,क्यों जमा पूंजी आपकी दांव पर लगी।।
हजारों मेहमान बुलाये,सैंकड़ों पकवान बनवाये।  फिर भी बरातियों और मेहमानों के नखरे कम न हो पाये।।
आप,बड़े पापा, चाचा और भैया रहें  इतने व्यस्त,परेशान।
करते रहे बारातियों की खातिर ,खूब किया मेहमानो का आतिथ्य सत्कार।।
टेंट और होटल में हुई पूंजी खल्लास । कर्ज लेकर निबटाया केटरिंग का हिसाब।।
शानदार पार्टी करने के लियें किया मेरे हक़ के गहनों का समझोता ।   
आपकी थी हिम्मत बेमिसाल ,कमजोर दिल वाला तो हाथ ही टेक देता।।
अपनी पीड़ा आपको बताने में आँख भर आती है।  सच कहती हूँ ,नकली गहने पहन कर अपनी इज्जत को तार -तार होने से बचाती हूँ।।
भविष्य के बारे में जब सोचती हूँ ,कांप जाती हूँ।
मेरी बेटी की जब शादी होगी तो क्या करुँगी,
क्या ख़ाली हाथ उसे विदा करुँगी।।
मेरे पास यदि पर्याप्त जेवर होते ।
उसे गलवा कर उसका श्रृंगार  करती।।       
अब भैया का क्या होगा यह सोच कर सहम जाती हूँ ।     
बिना पूंजी के व्यापार कैसे करेगा,यह सोच घबराती हूँ ।।       
अनुरोध करती हूँ सभी समाज जन को 21 आइटम या कम बनवाये ।
झूठी शान शौकत और दिखावा कर जमा पूंजी न गवाएं।।
स्वयं का और बेटी का भविष्य सुरक्षित करे उसे उसका हक़ देकर।
ताकि वह स्वाभिमान से पूरी जिंदगी खुश रहें।


रचियता:          संजय गोयल
सहयोगी  श्रीमती ऋतु  धानुका नीमच

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